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“हाय रे कोयला!” अब दिल्ली तक गूंजी धनबाद की पुकार, कोयला चोरी और अवैध खनन पर लगेगी लगाम?

धनबाद का बदनाम “काला सोना… लेकिन सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती!

धनबाद: झारखंड के धनबाद का “काला सोना” अब सिर्फ उत्पादन के लिए नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा को लेकर भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। वर्षों से कोयला चोरी, अवैध खनन और माफियाओं के बढ़ते नेटवर्क के बीच अब यह मामला सीधे भारत सरकार के गृह मंत्रालय तक पहुंच गया है।शुक्रवार को बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात कर धनबाद के खनन क्षेत्रों की सुरक्षा, कोयला चोरी और अवैध खनन के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। बैठक में इन चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक रणनीति पर चर्चा हुई।

हाय रे कोयला!”… अब चोरी पर सख्ती की तैयारी

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने स्पष्ट कहा कि अवैध खनन, कोयला चोरी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार हरसंभव सहयोग देगी। उन्होंने कहा कि कोकिंग कोयला देश की सामरिक और आर्थिक जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण खनिज है, इसलिए इसका सुरक्षित और निर्बाध उत्पादन सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।उन्होंने कहा कि भारत की आयातित कोकिंग कोयले पर निर्भरता कम करने में बीसीसीएल की भूमिका बेहद अहम है और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को पूरा करने में यह महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

अब और मजबूत होगी सुरक्षा, बढ़ेगी CISF की ताकत

बैठक में बीसीसीएल की खनन परिसंपत्तियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने पर सहमति बनी। सीआईएसएफ (CISF) की भूमिका की समीक्षा की गई और खदानों में उसकी तैनाती को और प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

कोयला… जिस पर टिकी है देश की इस्पात ताकत

गृह राज्य मंत्री ने कहा कि घरेलू कोकिंग कोयले का उत्पादन बढ़ाना देश के इस्पात उद्योग और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है। सुरक्षित खनन और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के बिना यह लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं होगा।

क्या अब रुकेगी कोयला चोरी?

धनबाद में लंबे समय से कोयला चोरी और अवैध खनन गंभीर समस्या बनी हुई है। ऐसे में केंद्र सरकार के इस आश्वासन के बाद उम्मीद जगी है कि खनन क्षेत्रों की सुरक्षा और सख्त होगी तथा कोयला चोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ज़मीन पर इसका असर कब और कितना दिखाई देता है।

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